Jupiter In 2nd,5th,7th,9th And 11th House From Natal Moon,i.e.Rashi, Is Benefic.
Tuesday, 29 April 2014
Monday, 28 April 2014
Tuesday, 8 April 2014
गीता दोहन *
पहला अध्याय
धृतराष्ट्र ने कहा-
1.
कुरुक्षेत्र के धर्म क्षेत्र में एकत्रित रण हित जो आज ।
मेरे तथा पाण्डु पुत्रों ने संजय ! कहो किया क्या काज ।।
2.
संजय ने कहा-
दुर्योधन नृप ने अवलोकित की है व्यूहबद्ध रिपु सैन ।
जाकर पास द्रोण गुरु के अब कहे नृपति ने हैं ये बैन ।।
3.
देखो तात पाण्डवों की यह सेना कैसी खड़ी महान् ।
व्यूहित हुई द्रुपद सुत से जो है तव शिष्य परम धीमान् ।।
4.
भीमार्जुन सम महा धनुर्धर उधर विपुल समरांग्ण में ।
महारथी नृप द्रुपद तथा सात्यकी ,विराट खड़े रण में ।।
5.
धृष्टकेतु हैं चेकितान भी तथा वीर काशी अवनीप ।
कुन्तिभोज पुरुजित एवं नर श्रेष्ठ शैव्य भी खड़े समीप ।।
6.
युधामन्यु , अभिमन्यु , तथा रण शूर उत्तमौजा विक्रान्त ।
तथा उपस्थित द्रुपद सुता के पांच बलशाली कांत ।।
7.
हे ब्राह्मण कुल श्रेष्ठ ! करो अब मेरी सैन्य शक्ति का ज्ञान ।
जो रणशूर विशिष्ट हमारे उन्हें गिनाता मैं श्रीमान् ।।
8.
आप स्वंय हैं यहां उपस्थित ,कृपाचार्य बलशाली कर्ण ।
अश्वत्थामा,भीष्म पितामह एवं भूरिश्रवा विकर्ण ।।
9.
अगणित शूर अन्य भी आये युद्ध विशारद अति बलवान ।
मेरे हित में जो पल भर में कर सकते जीवन बलिदान ।।
10.
भीष्म पितामह से रक्षित है चिर अजेय मम सैन्य प्रवीण ।
किन्तु भीम से आरक्षित है शत्रु अनी अति निर्बल क्षीण ।।
11.
पूर्व सुनिश्चित स्थानों पर अब सब शूर रहो तैयार ।
रक्षा करो भीष्म की सब मिल कहा नृपति ने है ललकार ।। 12.
शंखनाद कर शान्तनु सुत तब करने लगे गर्जना घोर ।
सुनकर नाद भूप दुर्योधन हुए हृदय में हर्ष विभोर ।। 13.
ढोल,मृदंग,शंख,रणभेरी की ध्वनि सहसा हुई अपार ।
तुमुल शब्द से जिसके तत्क्षण गूंज उठा सारा संसार ।। 14.
हुए शंख ध्वनि करने में तब अर्जुन और कृष्ण तल्लीन ।
युगल पुरुष जो श्वेत बाजियुत सुन्दर रथ में थे आसीन ।। 15.
' देवदत्त ' था शंख पार्थ का ' पाञ्चजन्य ' धारी गोपाल ।
' पौण्ड्र ' बजाया भीमसेन ने जिनके कृत्य परम विकराल ।।
16.
(.....जारी है....) *साल 1982 मे प्रकाशित मेरी पुस्तक ' गीता दोहन ' (श्रीमद्भगवद्गीता का हिंदी पद्यानुवाद ,यथारूप) का ऑनलाइन संस्करण ।
Friday, 29 November 2013
यौन शोषण या बलात् रति
यौन शोषण को लेकर इन दिनों प्रचार माध्यम और समाज काफी उद्वेलित है । प्रचलित कानून के अनुसार ऐसे प्रकरणों पर भी दंड दे दिया जाता है जिनमें तथाकथित पीड़ित महिला घटना के काफी अंतराल के बाद इसका उद्घाटन करती है । लगातार बहुत समय तक होने वाले कथित यौन शोषण को भी वही मान्यता दे दी जाती है जो अकस्मात बलपूर्वक किये गए यौन शोषण की होती है । यद्यपि दोनो में बहुत अंतर है । जहां यौन शोषण अथवा बलात् रति एक निंदनीय और दंडनीय कार्य है वहीं इसके प्रावधानों का दुरुपयोग भी उतना ही निंदनीय और दंडनीय होना चाहिए । जमीनी सच्चाई ये है कि बहुधा लंबे अर्से तक पुरूष से अनुचित लाभ उठाने के लिए महिला यौन उपभोग करवाती है और निहित स्वार्थ की पूर्ति न होने पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगा देती है । अत: ये आवश्यक है कि यौन शोषण घटित होने के बाद एक निश्चित समयावधि में पीड़िता को इसका उद्घाटन कर देना चाहिए और कानून की शरण में चला जाना चाहिए तथा ऐसा न होने पर उसकी सत्यता ज्यों की त्यों स्वीकार्य नहीं होनी चाहिए ।
स्त्री के प्रति पुरूष का आकर्षण और यौन शोषण एक मानव सुलभ दुर्बलता है जो सनातन काल से होता चला आया है । प्राचीन धर्म ग्रंथों में सूर्य और कुंती तथा ऋषि पाराशर और सत्यवती आदि के बलात् रति प्रसंग मौजूद हैं ; लेकिन ये लोग और इनकी संतानें कर्ण और वेदव्यास समाज में कुत्सित और घृषित नहीं माने गए ।
अत: जहां एक और हमें ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सामाजिक चेतना जागृत करनी चाहिए वहीं दूसरी ओर इसके दुरूपयोग से उत्पन्न परिणामों पर भी ध्यान देना चाहिए ।
स्त्री के प्रति पुरूष का आकर्षण और यौन शोषण एक मानव सुलभ दुर्बलता है जो सनातन काल से होता चला आया है । प्राचीन धर्म ग्रंथों में सूर्य और कुंती तथा ऋषि पाराशर और सत्यवती आदि के बलात् रति प्रसंग मौजूद हैं ; लेकिन ये लोग और इनकी संतानें कर्ण और वेदव्यास समाज में कुत्सित और घृषित नहीं माने गए ।
अत: जहां एक और हमें ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सामाजिक चेतना जागृत करनी चाहिए वहीं दूसरी ओर इसके दुरूपयोग से उत्पन्न परिणामों पर भी ध्यान देना चाहिए ।
Monday, 7 October 2013
नदियों में मूर्ति विसर्जन पर रोक,एक सही फैसला
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने संगम नगरी की गंगा-यमुना नदियों में देवी-देवताओं की मूर्तियों के विसर्जन पर रोक लगा दी है । कोर्ट का ये आदेश अगले साल से उत्तर प्रदेश की सभी नदियों में मूर्ति विसर्जन पर रोक लगा देगा । ये एक स्वागत योग्य फैसला है । धार्मिक मामलों में अभी और सुधार की जरूरत है । ऐसे और सख्त फैसले आने चाहिए ।
Monday, 2 September 2013
आसाराम को जेल भेजना, देर से उठाया गया छोटा कदम
आसाराम को जेल भेजा जाना, देर से उठाया गया एक छोटा कदम है । आसाराम की सारी संपत्ति का राष्ट्रीयकरण किया जाना चाहिए ।
Tuesday, 23 April 2013
जपयोग
आत्मा के परमात्मा से योग की विधियों में जपयोग का बड़ा महत्व है जिसमें मंत्र-जप सहित ध्यान माध्यम बनता है। ध्यान अपने आराध्य के पूर्ण चित्र या शरीर के किसी विशेष भाग पर अथवा मंत्र के अर्थ या शब्दों पर किया जाता है। मंत्र गुरु प्रदत्त होना चाहिए। गुरु मंत्र न होने पर आकार में छोटा मंत्र चुने, जैसे राम या ओम आदि। मंत्र का उद्देश्य ही है कि मनन से त्रण दिलाने वाला। कहा गया है कि शब्द में महान शक्ति होती है और मंत्र-स्वर की लहरियां संपूर्ण आकाश मंडल में प्रवाहित होकर प्रभाव डालती हैं। मंत्र के चित्र या श्री विग्रह भी होते हैं। मंत्रर्थ न जानते हुए या अज्ञानी होते हुए भी यांत्रिक ढंग से जप करने पर भी वैज्ञानिक आधारों पर मंत्र से संबंधित स्वरूप साधक के अंत:करण में प्रविष्ट होकर आत्म प्रकाश फैलाएगा। मंत्र जप तीन प्रकार का होता है। वैखरी अर्थात् स्फुट उच्चारण करके, उपांशु अर्थात बहुत हल्केस्वर से अर्थात जिसे दूसरा न सुन-समझ सके और मानसिक, जो अंदर ही अंदर चले। जप में ज्यो-ज्यों आगे बढ़ते जाएंगे, ध्यान की सघनता और आराध्य में संलग्नता बढ़ती जाएगी और कालांतर में अविरल ध्यान ही चलेगा, जो समाधि या ब्राह्मी स्थिति में परिवर्तित हो जाएगा। साध्य प्राप्त हो जाने पर साधन के उपयोग की आवश्यकता ही नहीं रह जाएगी। दूसरे शब्दों में कहें तो ऐसी स्थिति में मंत्र की विशेष उपयोगिता नहीं रह जाती है।
गीता के दशम अध्याय में अपनी विभूतियों का वर्णन करते हुए भगवान श्रीकृष्ण ने कहा है कि यज्ञों में मैं जपयज्ञ हूं। वीर शिवाजी के गुरु रामदास को आध्यात्मिक ऊंचाइयां श्रीराम जयराम जय जय राम के जप से मिलीं, जिसे उन्होंने गोदावरी के जल में खड़े होकर तेरह करोड़ बार जपा। स्पष्ट है कि जप की महत्ता अनिर्वचनीय और लोक हितकारी है। जिसने भी जप का महत्व समझ लिया और अपने तथा लोक के कल्याण के लिए इसका सहारा लिया उसे इसका लाभ मिलना तय है।
रघोत्तम शुक्ल
http://epaper.jagran.com/ePaperArticle/23-apr-2013-edition-Delhi-City-page_8-16555-104940208-4.html(यह आलेख दैनिक जागरण में दिनांक 23 अप्रैल 2013 को प्रकाशित हुआ । )
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