Friday, 24 February 2012

वेदों में सोम

वैदिक वाड्गमय में 'सोम' का वर्णन आया है तथा उसके रस को पान करने उसके
प्रभाव का पर्याप्त उल्लेख है उसकी स्तुतियां भी की गईं है ऋग्वेद के नवम्
मंडल सामवेद के 'पवमान'पर्व में सोम विषयक मंत्र एकत्र हैं मूलत: सोम
पर्वतीय क्षेत्र में पाई जाने वाली कोई अत्यन्त गुणकारी वनस्पति ही थी जिसे
पत्थरों से घर्षण करके उसके हरित वर्ण रस को निकाला जाता था फिर उसे एक घड़े
में ऊनी कपड़े से छाना जाता था इस तरह घड़े मे एकत्र हरित रस को दूध में
मिलाकर विशेषकर यज्ञ के अवसर पर उसका पान किया जाता था शकर और धु जैसे उफान
(
फोमेंटेशन) उत्पन्न करने वाले पदार्थ उसमें नहीं मिलाये जाते थे,जिससे उसके
मादक पदार्थ होने की संभावना नहीं है साथ ही यह भी कि वह तत्काल ही पान कर
लिया जाता था अत: मादकता आने की संभावना नहीं थी इतना अवश्य है कि इसके पान
से उत्साह,साहस और बल अत्यधिक बढ़ जाता था,जिससे इसके मादक होने का भ्रम लोगों
में उत्पन्न हो जाता है वेदों के कुछ मंत्र इसके गुणों पर प्रकाश डालते हैं
यथा - "इन घूंटों ने मुझे तीव्र पवन के समान उठा दिया है क्या मैने सोमरस पान
किया है ? " तथा "मैं पृथ्वी को उठा लूंगा और यत्र तत्र रख दूंगा क्या मैने
सोमरस का पान किया है ?" इन प्रसंगों दिर शब्द भी आया है किन्तु उसका
'
आनन्ददायक' ही है 'उन्मादक' नहीं है सभाओं और युद्ध में भी इसका पान किया
जाता था प्राचीन फारस के 'जरोष्ट्रियन'भी इसी प्रकार का एक पेय रखते थे,जिसे
वो HAOMA कहते थे भारतीय चिंतन और संस्कृति में वनस्पति और औषधियों का पोषक
चन्द्रमा है,जिसे सोम भी कहते हैं इसे देवता का दर्जा दिया गया है और इस हेतु
गुणवन्ती सोम वनस्पति को देवता नते हुए स्तुतियां भी की गईं हैं इसे
'
प्रकृति देवसत्ता' भी कहा गया है यह गुणशालिनी रसवन्ती वनस्पति अब खोज से
बाहर है,जैसे रामायण वर्णित 'संजीवनी' इनकी खोज की जानी चाहिए इसकी प्राप्ति
से मानव कल्याण का पथ प्रशस्त होगा सामवेद में कहा गया है कि -"शरीर में
प्रविष्ट हुआ सोमरस समस्त श्रेयों को प्राप्त कराता हुआ जीव के लिए शक्ति दाता
होता है "वो आसुरी भावों को दूर कर उसे दैवी भावों से भर देता है

(यह आलेख दैनिक जागरण के संपादकीय पृष्ठ पर दिनांक 25 फरवरी 2012 को प्रकाशित हुआ । )

Monday, 20 February 2012

शिव वंदना

शंकर , शशांक,शीश,शम्भु,शिव , शूलपाणि ,
शशिशिर,शैलजेश,शर्व,शाम्भवी के पति ।।
कण्ठ कालकूट,काम कदन, कपाली,कालीकंत,
करुणाकर,कपर्दी है कृपालु अति ।।
भूतनाथ,भव्य,भव,भस्म अंग,भालज्वाल,
भीम,भवतारक भवेश,भक्त अंतगति ।
चैलहीन,चण्ड,चिन्त्य,' शुक्ल ' ,चित्त चिंतामणि ,
चन्द्रचूड़ चारु अंध्रि युग्म में मदीय रति ।।

Saturday, 14 January 2012

भारत भू की रज



अखिल विश्व में सबसे पावन भारत भू की रज है ।


    इसी धूल में लोट पोटकर खेल राम हमारे ।


मुख में इसे डाल लेते थे नटखट नन्द दुलारे ।


चकित शारदा महिमा लखकर सुर विस्मित हो जाते।


थक थक जाते शेष सहस फण से गुण गाते गाते ।।


इसे सृजित कर मन में निज को धन्य मानता अज है ।


अखिल विश्व में सबसे पावन भारत भू की रज है ।


जनक भरत से जनमें इस पर,राज्य लिये सन्यासी।


त्याग रूप थे विश्व -धर्म -गुरु बुद्ध इसी के वासी ।।


मरघट में भी अति पवित्र यह,शम्भु देह में  मलते।


इस पर होता जन्म अमित पुण्यों के जब फल फलते ।।


भव्य भावना भरित,परम शुचि,कण कण काशी हज है ।


अखिल विश्व में सबसे पावन भारत भू की रज है ।


एकलव्य ने काटा अंगुठा गुरु आज्ञा पालन में।


महक रहा है दिव्य सुमन सा भील कीर्ति कानन में ।


इसी रेणु से चिर प्रणम्य थी जनमी पन्नादाई।


परहित में हंसते हंसते नित सुत की जान गंवाई ।।


कैसा उच्च महान यहां का धन्य 'शुक्ल'अन्त्यज है ।


अखिल विश्व में सबसे पावन भारत भू की रज है ।

Thursday, 12 January 2012

मातृभूमि वंदना



भारत मां की पावन धरती को शत-शत वंदन 


बहता यहां सुधा सम सुन्दर सुर सरिता का जल ।


रत्नाकर करता प्रक्षालन इसके अंघ्रि कमल ।।


उत्तर में उत्तुंग रजत सा है कैलास शिखर ।


रहकर जहां सतत रक्षारत शूलपाणि शंकर ।


भला बताओ इसके सम्मुख क्या उपवन नन्दन ?


भारत मां की पावन धरती को शत-शत वंदन 


मानवता हित तजा बुद्ध ने वैभवमय जीवन ।


किये कर्ण ने दान मृत्यु शय्या पर स्वर्ण रदन।


करते यहां दधीच लोक हित अस्थिजाल देकर।


पी लेते कल्याण हेतु जग के विष विधु शेखर ।।


हीरज अज प्रणम्य पद नीरज रज सुर उर चन्दन ।


भारत मां की पावन धरती को शत-शत वंदन 


वीर शिवा राणा प्रताप से हुए इसी भूपर ।


अत्याचारों अन्यायों से युद्ध किया डटकर ।।


भगतसिंह आदिक कितनों ने जान गंवाई है ।


यहां नारियों ने रण में तलवार चलाई है । ।


स्वयं चलाते कृष्ण यहां के शूरों का स्यन्दन ।


भारत मां की पावन धरती को शत-शत वंदन 

Tuesday, 27 December 2011

चारित्रिक आधारों की

आज देश को आवश्यकता चारित्रिक आधारों की!
कोटि-कोटि जनता पल भर में कैसे कहो गुलाम हुई?
संविधान की छीछालेदर स्वतंत्रता नीलाम हुई!!
क्योंकि आत्मबल ह्रास हो गया है अब अपनी पीढ़ी में!
नैतिकता की कमी सभी वर्गो में है अब आम हुई!
भूल न जाना गाथा आपत्कालिक अत्याचारों की!!
आज देश को आवश्यकता चारित्रिक आधारों की!
जमकर करें वंचना जो भी वही कुशल व्यापारी हैं
पंडित और पुजारी छलते सन्यासी व्यभिचारी हैं!
मानप्रतिष्ठा जानमाल रक्षा का नहीं भरोसा है।
शहजादों की भांति मानते अपने को अधिकारी हैं!!
किसी जगह भी दीख रही है कमी न भ्रष्टाचारों की
आज देश को आवश्यकता चारित्रिक आधारों की!
संताने हम युगपुरुषों की जिनकी अमर कहानी है।
राम कृष्ण गौतम गांधी की जग में कहीं न सानी है!!
किंतु हो गया हमें आज क्या अनाचार क्यों बढ़ा हुआ ?
शिवि दधिचि की संतति का क्यों मरा आंख का पानी है!!
पत्रकार, कवि अवसरवादी,राजनीति है नारों की
आज देश को आवश्यकता चारित्रिक आधारों की!

Friday, 23 December 2011

लोकपाल और आरक्षण

केंद्रीय सरकार द्वारा संसद में पेश किए गए लोकपाल विधेयक के अनुसार,पारित होने की दशा में इस संस्था में जातीय आरक्षण की व्यवस्था होगी
जो पचास प्रतिशत से कम नहीं होगी।यह नितांत अनुचित प्रस्ताव है क्योंकि लोकपाल संस्था भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए सृजित की जा रही है।
जिसके लिए स्वच्छ छवि वाले और ईमानदार व्यक्तियों की जरूरत है। इसमें जाति धर्म से क्या लेना देना। कांग्रेस जानबूझकर इस संस्था को कलुषित
करने का प्रयास कर रही है। कांग्रेस पहले ये तो बता दे कि उसकी सुप्रीमो 'सोनिया' और भावी प्रधानमंत्री कंडिडेट 'राहुल' की कौन जाति है।वे 'गांधी'
अपने को कैसे लिखते है? गांधी तो वैश्य जाति/वर्ण की एक शाखा है और राहुल फिरोज खान के पौत्र है,जो पारसी थे। सोनिया तो दरअसल
'एंटोनिया माइनो' है जो फिरोज खान के पुत्र राजीव की पत्नी है और राहुल उनके पुत्र ,फिर छद्म जाति से वे अपने को प्रचारित कर देश को धोखा क्यों दे रही है।

Thursday, 22 December 2011

जन लोकपाल

अन्ना हजारे के लोकपाल आंदोलन को लेकर केंद्र सरकार की टालमटोल नीति जारी है।भ्रष्टाचार के पौधे को विशाल वृक्ष का रुप देने वाली कांग्रेस और उसके सहयोगी दल तमाम कुतर्कों के बीच यह भी कह रहे है कि अन्ना निर्वाचित जन प्रतिनिधि नहीं है। वे अपना राजनीतिक दल बनाकर इतने सांसद जिताए कि उनके अनुसार लोकपाल
विषयक कानून बन सके। संसद की सर्वोच्चता की दुहाई दी जा रही है। उनसे हमें यह कहना है कि महात्मा गांधी और जयप्रकाश नारायण भी सांसद या विधायक नहीं थे
किंतु सरकारें और देश उनके सम्मुख नतमस्तक था। उन्हें 'राष्ट्रपिता' और 'लोकनायक' की उपाधियां जनता ने ही दीं न कि शासकों ने।यही नहीं देश के वर्तमान प्रधानमंत्री कौन सा जन चुनाव जीते है तथा देश की स्वतंत्रता प्राप्ति के समय सत्ता हस्तांतरण पंडित जवाहरलाल नेहरू को प्रधानमंत्री बनाकर क्यों किया गया? तब वे चुनकर कहां आए
थे?समय की मांग है कि संप्रग जल्द से जल्द जन-लोकपाल या उससे मिलता जुलता लोकपाल कानून पास करे। अन्यथा जनक्रांति अवश्यम्भावी है।
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